Rain Alert January 2026: के तहत उत्तर भारत में मौसम का मिजाज तेजी से बदलता नजर आ रहा है। जनवरी के मध्य में जहां लोग कड़ाके की ठंड और शीतलहर से परेशान थे, वहीं अब हालात धीरे-धीरे बदल रहे हैं। हवाओं की दिशा में आए बदलाव के कारण सर्दी का असर कुछ हद तक कम हुआ है और कई इलाकों में न्यूनतम तापमान में साफ बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि ठंड से राहत के साथ-साथ अब बारिश और पहाड़ों में बर्फबारी का एक लंबा सिलसिला शुरू होने जा रहा है, जो आने वाले दिनों में जनजीवन को प्रभावित कर सकता है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार 19 जनवरी से 26 जनवरी 2026 के बीच पूरे उत्तर भारत में मौसम की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है। इस दौरान एक के बाद एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होंगे, जिनका असर पहाड़ी क्षेत्रों से लेकर मैदानी इलाकों तक देखने को मिलेगा।
हवाओं की दिशा बदली, तापमान में बढ़ोतरी
पिछले कुछ दिनों में उत्तर भारत के कई हिस्सों में हवाओं का रुख बदल गया है। पहले जहां उत्तर-पश्चिमी ठंडी हवाएं चल रही थीं, वहीं अब अपेक्षाकृत गर्म हवाओं के असर से न्यूनतम तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हिसार, दिल्ली, चूरू और आसपास के क्षेत्रों में रात के तापमान में 4 से 6 डिग्री सेल्सियस तक का इजाफा देखा गया है।
इस बदलाव के कारण शीतलहर का असर कमजोर पड़ा है और पाले की स्थिति में भी कमी आई है। किसानों और आम लोगों के लिए यह राहत भरी खबर है, क्योंकि लंबे समय से जारी कड़ाके की ठंड से थोड़ी राहत महसूस की जा रही है। हालांकि यह राहत ज्यादा समय तक टिकने वाली नहीं मानी जा रही, क्योंकि मौसम का अगला चरण बारिश और बर्फबारी के साथ दस्तक देने वाला है।
तीन पश्चिमी विक्षोभ बदलेंगे मौसम की चाल
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक आने वाले दिनों में तीन पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत को प्रभावित करेंगे। ये सभी सिस्टम अलग-अलग समय पर सक्रिय होंगे और हर एक का असर अलग स्तर पर देखने को मिलेगा।
पहला पश्चिमी विक्षोभ 19 से 21 जनवरी के बीच सक्रिय रहेगा। इसके चलते जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और ऊंचाई वाले पर्वतीय इलाकों में बर्फबारी होने की संभावना है। इस दौरान मैदानी इलाकों में मौसम अपेक्षाकृत शुष्क रह सकता है, लेकिन पहाड़ों पर ठंड और बर्फबारी तेज होगी।
22–23 जनवरी को शक्तिशाली सिस्टम, मैदानी इलाकों में बारिश
दूसरा पश्चिमी विक्षोभ 22 और 23 जनवरी के आसपास सक्रिय होगा और इसे काफी शक्तिशाली माना जा रहा है। इस सिस्टम का असर केवल पहाड़ों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में भी बारिश देखने को मिल सकती है।
पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान के कई जिलों में इस दौरान बादल घिरने और बारिश होने के आसार हैं। कुछ स्थानों पर तेज बारिश के साथ ठंडी हवाएं चल सकती हैं, जिससे तापमान में फिर से गिरावट महसूस हो सकती है। दिल्ली-एनसीआर में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई जा रही है, जो प्रदूषण और धुंध से कुछ राहत दे सकती है।
उत्तराखंड और हिमाचल में भारी बर्फबारी की संभावना
उत्तराखंड के लिए यह सिस्टम खास मायने रखता है। जिन पहाड़ी इलाकों में अब तक पर्याप्त बर्फबारी नहीं हुई थी, वहां 23 जनवरी के आसपास भारी बर्फबारी और तेज बारिश होने की संभावना है। इससे पहाड़ों पर बर्फ की मोटी चादर बिछ सकती है।
हिमाचल प्रदेश के लगभग सभी प्रमुख हिल स्टेशन जैसे शिमला, मनाली और कुफरी में बर्फबारी देखने को मिल सकती है। यह बर्फबारी पर्यटन के लिहाज से आकर्षक होगी, वहीं जल स्रोतों और ग्लेशियरों के लिए भी बेहद जरूरी मानी जा रही है।
राजस्थान और उत्तर प्रदेश में भी बदलेगा मौसम
दूसरे पश्चिमी विक्षोभ का असर राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक भी फैल सकता है। राजस्थान के कोटा, बूंदी और आसपास के इलाकों में बारिश होने की संभावना है। वहीं उत्तर प्रदेश में बरेली, मेरठ, मुजफ्फरनगर और आसपास के जिलों में बादल छाने और हल्की से मध्यम बारिश के आसार बन रहे हैं।
24 जनवरी तक यह मौसमी गतिविधियां धीरे-धीरे पूर्व दिशा की ओर बढ़ सकती हैं। इसके चलते लखनऊ, शाहजहांपुर और आसपास के इलाकों में भी बारिश या बूंदाबांदी देखने को मिल सकती है। इससे ठंड में एक बार फिर इजाफा हो सकता है।
गणतंत्र दिवस के आसपास फिर बदल सकता है मौसम
सबसे अहम अपडेट 26 जनवरी को लेकर है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि गणतंत्र दिवस के आसपास एक और पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत में दस्तक दे सकता है। इसके प्रभाव से 26 जनवरी की सुबह या शाम को दिल्ली-एनसीआर और आसपास के मैदानी इलाकों में फिर से बारिश होने की संभावना है।
यदि ऐसा होता है तो इसका असर गणतंत्र दिवस की परेड और अन्य आयोजनों पर भी पड़ सकता है। हालांकि अभी इस सिस्टम को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन संभावना को देखते हुए प्रशासन को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
किसानों के लिए जरूरी सलाह
आने वाली बारिश और मौसम के बदलाव किसानों के लिए मिश्रित असर लेकर आ सकते हैं। एक ओर यह बारिश रबी फसलों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है, क्योंकि इससे मिट्टी में नमी बढ़ेगी। दूसरी ओर तेज बारिश या हवाओं के कारण खड़ी फसलों को नुकसान भी पहुंच सकता है।
किसानों को सलाह दी गई है कि वे मौसम के पूर्वानुमान को ध्यान में रखते हुए सिंचाई, कटाई और अन्य कृषि कार्यों की योजना बनाएं। खासकर सरसों, गेहूं और सब्जी उत्पादक किसानों को सतर्क रहने की जरूरत है।
पर्यटन और जल संसाधनों के लिए अच्छी खबर
पर्यटकों के लिए यह मौसम बेहद खास रहने वाला है। 23 जनवरी के बाद हिमाचल और उत्तराखंड के अधिकतर प्रमुख पर्यटन स्थल बर्फ से ढके नजर आ सकते हैं। इससे पर्यटन गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है।
साथ ही यह बर्फबारी जल संसाधनों के लिए भी बेहद अहम मानी जा रही है। ग्लेशियरों पर जमा होने वाली बर्फ नदियों के जलस्तर को बनाए रखने में मदद करेगी, जो आने वाले गर्म महीनों के लिए जरूरी है।
निष्कर्ष
Rain Alert January 2026 के तहत साफ है कि उत्तर भारत में अगले कुछ दिन मौसम के लिहाज से काफी उतार-चढ़ाव भरे रहने वाले हैं। सर्दी से मिली राहत ज्यादा देर टिकने वाली नहीं है, क्योंकि बारिश और बर्फबारी का दौर शुरू होने जा रहा है।
कहीं यह बारिश राहत देगी तो कहीं परेशानी भी बढ़ा सकती है। ऐसे में आम लोगों, किसानों और प्रशासन सभी को सतर्क रहने की जरूरत है। मौसम से जुड़े ताजा अपडेट्स पर नजर रखना और उसी के अनुसार अपनी योजना बनाना ही सबसे बेहतर विकल्प होगा।











